Editors Choice

3/recent/post-list

Recent Product Releases

Lorem Ipsum has been the industry's standard dummy text.

recent posts

यह ब्लॉग खोजें

Comments

All

Design

3/Design/post-list

Pages

Subscribe Us

​The Science of Shakes: Why Does the Earth Vibrate?

पृथ्वी में कंपन (भूकंप) कैसे होता है? - एक सरल व्याख्या


चरण 1: भ्रंश या दरारें

हमारी पृथ्वी की ऊपरी सतह (पपड़ी) एक अखंड ब्लॉक नहीं है, बल्कि इसमें बड़ी-बड़ी गहरी दरारें होती हैं। इन दरारों को ही भ्रंश (Faults) कहते हैं।


Image by editetch.online 



(चित्र 1: यह चित्र दिखाता है कि पृथ्वी की चट्टानें (शैलखंड) एक दरार (भ्रंश) द्वारा दो हिस्सों में बंटी हुई हैं, जो अभी शांत और एक साथ हैं। )

चरण 2: विपरीत दिशा में दबाव

भ्रंश के दोनों तरफ के शैलखंड हमेशा एक-दूसरे से विपरीत दिशा (Opposite Directions) में गति करने की कोशिश करते हैं। पृथ्वी के अंदर के बलों के कारण वे एक को एक तरफ और दूसरे को दूसरी तरफ धकेलते हैं।




(चित्र 2: यहाँ लाल तीर दिखाते हैं कि कैसे दोनों शैलखंड एक-दूसरे से विपरीत दिशाओं में गति करने का प्रयास कर रहे हैं। )

चरण 3: घर्षण और रुकावट

हालांकि वे विपरीत दिशा में जाना चाहते हैं, लेकिन चट्टानें बहुत भारी और खुरदुरी होती हैं। ऊपरी चट्टानों के भारी दबाव और उनके बीच के घर्षण (Friction) के कारण वे आपस में कसकर जुड़ी रहती हैं। यह घर्षण उन्हें खिसकने से रोके रखता है (बांधे रखता है)। इसलिए, वे चाहकर भी तुरंत खिसक नहीं पातीं और वहां बहुत सारा दबाव जमा होने लगता है।


Image

(चित्र 3: यह चित्र दिखाता है कि कैसे घर्षण और भारी दबाव (नीचे की ओर काला तीर) ने चट्टानों को विपरीत दिशा में जाने वाले लाल तीरों के बावजूद एक जगह अटका (Lock) दिया है। वे तनाव में हैं, लेकिन हिल नहीं पा रहे। )

चरण 4: अचानक खिसकना और ऊर्जा का निकलना

जब चट्टानों का विपरीत दिशा में खिसकने वाला बल घर्षण से अधिक शक्तिशाली हो जाता है, तो चट्टानें अचानक एक झटके के साथ अलग होकर तेजी से खिसकती हैं। इस झटके से बहुत सारी ऊर्जा (Energy) बाहर निकलती है।

Image by editetch.online 



(चित्र 4: यहाँ अटका हुआ हिस्सा टूट गया है! बड़े लाल और पीले रंग के विस्फोट (Burst) के निशान 'अचानक खिसकने' और ऊर्जा के निकलने को दर्शाते हैं। ऊर्जा तरंगों के रूप में बाहर निकल रही है। )

चरण 5: कंपन और तबाही

यह निकली हुई ऊर्जा तरंगों के रूप में सभी दिशाओं में फैलती है। जब ये तरंगें पृथ्वी की सतह पर पहुँचती हैं, तो हमें कंपन महसूस होता है, जिससे इमारतें हिलती हैं और तबाही मचती है।



Image
(चित्र 5: यह अंतिम चित्र पूरी प्रक्रिया का परिणाम दिखाता है। ऊर्जा तरंगों के रूप में बाहर फैलती है, जिससे जमीन फट जाती है (काली दरारें) और इमारतें हिलने लगती हैं। )


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ