अखिर इतने भूकंप क्यो ????

भूकंप (भूकंप)



  1. पृथ्वी के अंतर्जात एवं बहिजांत एकजुटता के कारण ऊर्जा का निष्कासनहोता है, जिसके कारण तरंगों की उत्पत्ति होती है, जो सभी दिशाओं मेंफैलकर पृथ्वी पर कंपन उत्पन्न करती है, इसे ही 'भूकप' कहते हैं।वस्तुतः प्राकृतिक घटनाओं से पृथ्वी के कंपन को ही 'भूकंप' कहतेहैं लेकिन कभी-कभी मानवीय कारणों से भी भूकंप आते रहते ह
  2. जैसे- परमाणु परीक्षण द्वारा उत्पन्न भूकंप, भूमिगत खानों की छतोके गिरने से उत्पन्न भूकंप आदि।पृथ्वी की सतह पर भूकंप के समान तीव्रता वाले बिंदुओं को मिलानेवाली रेखा को 'समभूकंपी रेखा' (Isoseismal Line) कहते हैं।
  3. ह स्थान जहाँ से ऊर्जा तरंगों की उत्पत्ति होती है, उसे भूकंप काउद्गम केंद्र' या 'भूकंप मूल' (Focus) कहते हैं। वह बिंदु जहाँ 5 तपर भूकंपी तरंगें सबसे पहले पहुँचती है, उसे भूकंप का 'अधिकेंद्र'Epicentre) कहते हैं, जो उद्गम केंद्र के ठीक ऊपर या 90 डिग्रीके कोण पर स्थित होता है। भूकंप आने से पहले वायुमंडल में रेडॉन गैसों की मात्रा में वृद्धि होजाती है। अत: रेडॉन गैस की मात्रा में वृद्धि उस क्षेत्र विशेष मेंभूकंप आने का संकेत होता है।
  4. भूकंप के अध्ययन को 'सिस्मोलॉजी' कहते है
  5. भूकंपीय तरंगें (Seismic Waves)
  6. सामान्यतः भूकंपीय तरंगों को दो वर्गों में विभाजित किया जाता है-

  7. . भूगर्भीय तरंगें: 'P' तरंगें तथा 'S' तरंगें
  8. . धरातलीय तरंगें: 'L' तरंगे
  9. P तरंग भूकंप के समय सबसे पहले P तरंगों की उत्पत्ति होती है जो अउद्गम स्थल से चारों तरफ गमन करती हैं। पृथ्वी की सतह पसबसे पहले 'पृ' तरंगों का ही अनुभव होता है। इन्हें 'प्राथमिक तरंगे'(Primary waves) भी कहते हैं।"P ये ध्वनि तरंगों के समान 'अनुदैर्ध्य तरंग' होती है। अतः ये तरंगेंठोस, तरल एवं गैस तीनों माध्यमों में गमन कर सकती हैं लेकिनइनका वेग ढोस, तरल एवं गैस में क्रमशः कम होता जाता है।• इनकी गति सबसे तेज तथा तीव्रता सबसे कम (S एवं L से) होती है।
  10. S तरंगें• P तरंगों के पश्चात S तरंगें पृथ्वी की सतह पर पहुँचती हैं। यहींकारण है कि इन्हें 'द्वितीयक तरंगें' (Secondary Waves) अथवा'गौण तरंगें' भी कहते हैं।• ये प्रकाश तरंगों के समान 'अनुप्रस्थ तरंगें' होती हैं।• इनकी गति P से कम एवं L से अधिक होती है।• इनकी तीव्रता P से अधिक एवं L से कम होती है।• ये केवल 'ठोस माध्यम' में गमन करती हैं।
  11. L. तरंगें● इन्हें 'लब वेव' (Love waves) भी कहते हैं। इनका नामकरणवैज्ञानिक 'एडवर्ड हफ लव' के नाम पर किया गया है।• इनकी गति सबसे (P एवंS से) कम होती है, अत: L तरंगें पृथ्वी तह पर P तथा S के पश्चात् प्रकट होती हैं।• इनकी तीव्रता Pएवं S से अधिक होती है तथा ये सर्वाधिक विनाशकारहोती हैं।| नोट: अनुदैर्ध्य तरंगें (Longitudinal Waves): इसमें कणों कंपन/दोलन तरंग की दिशा के समानांतर होता है, जैसे- ध्वनि तरंगेंगे।| अनुप्रस्थ तरंगे (Transverse Waves): इसमें कणों का कंपन यादोलन तरंग की दिशा के लंबवत् होता है, जैसे- प्रकाश तरंगेंगे।भूकंपीय तरंगों का संचरण (Transmission of Seismic Waves)• भूकंपशास्त्र के अध्ययनानुसार, भूकंप की उ

    त्पत्ति P, S, एवं L तरंगके रूप में होती है। भूकंपीय तरंगों के संचरण में सबसे पहले P.फिर S एवं अंत में L तरंगों का गमन होता है।• भूकंपीय तरंगों की गति का पदार्थ के घनत्व से सीधा संबंध होताहै। अतः पृथ्वी की आंतरिक परतों का घनत्व सतह की अपेक्षाअधिक होने के कारण भूकंपीय तरंगों की गति में वृद्धि होती है।
  12. • पृथ्वी की आंतरिक परतों में गुटेनबर्ग असांतत्य (2,900 किमी. कीगहराई) तक P एवंऽ तरंगों की गति में वृद्धि होती है, इसके बादS तरंगें विलुप्त हो जाती हैं तथा P तरंगों की गति में अचानक कमीआती है, क्योंकि 'बाह्य कोर' का पदार्थ तरल अवस्था में हैं औरS तरंगें केवल ठोस माध्यम में गमन करती हैं।• बाह्य कोर में P तरंगों का 'परावर्तन' एवं 'आवर्तन' होता है, लेकिनआंतरिक कोर में पहुँचते ही P तरंगों की गति में पुनः वृद्धि होने लगतीहै, क्योंकि अत्यधिक दाब के कारण आंतरिक कोर का पदार्थ ठोसअवस्था में हैं। वहीं, L तरंगें केवल सतह पर ही गति करती हैं, इसलियेयह सबसे अधिक विनाशकारी होती हैं।भूकंपीय तरंगों का छाया क्षेत्र(Shadow Zone of Seismic Waves)● पृथ्वी पर एक ऐसा क्षेत्र जहाँ पर भूकंपलेखी द्वारा भूकंपीय तरंगों काअभिलेखन नहीं हो पाता, उसे भूकंपीय तरंगों का 'छाया क्षेत्र' कहते हैअर्थात् इस क्षेत्र में भूकंपीय तरंगों का संचरण नहीं होता है।• भूकंप के अधिकेंद्र से 105° के भीतर सभी स्थानों पर P एवं S दोनोंतरंगें गति करती हैं, जबकि 105° से 145° के बीच दोनों तरंगों काअभाव होता है इसलिये यह क्षेत्र दोनों तरंगों (P एवं S) के लिये 'छायाक्षेत्र' होता है।

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