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पर्यटक एपिसोड #1


भारत  एक  भौगोलिक संस्कृति एव  राजनीतिक रूप  से एक सम्पन्न राष्ट्र है जो उतर मे हिमालय पश्चिमी मे मरुस्थल व दश्रिण मे अथाह समुद्र का होना भारत को एक पर्यटक के रूप मे देखा जा सकता हे अगर आप भी किसी पर्यटक स्थल की यात्रा करना चाहते हो तो आज मे आपको विश्व व भारत के प्रमुख पर्यटक स्थल की यात्रा  के बारे मे बताउग इस ब्लॉग मे 
भारत  के प्रमुख पर्यटक स्थल
विश्व में पर्यटन एक अत्यंत महत्वपूर्ण उद्योग है, जो न केवल आर्थिक विकास में योगदान देता है, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी कारण बनता है। विभिन्न देशों और क्षेत्रों में अद्वितीय स्थल होने के कारण, पर्यटक विभिन्न अनुभव प्राप्त करने के लिए यात्रा करते हैं। इस लेख में, हम विश्व के कुछ प्रमुख पर्यटक स्थलों का अवलोकन करेंगे, जिनमें सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक महत्व के स्थल शामिल हैं।
1.दार्जिलिंग #दार्जिलिंग 
                                          दार्जिलिंग भारत के दशिण राज्य पश्चिम बंगाल का एक हिल स्टेशन है जो यह औसत ऊंचाई 2134 है यहा स्थान खुबसूरत पहाडी पर स्थित है जो आपको प्राकृतिक दर्शन को ओर लेकर जावे मै आपको उस स्थान की सम्पूर्ण जानकारी देता हू दाजिलिग को पहाडों की रानी कहा जाता है  यहा नगर देखने मै बहूत खुबसूरत व रोमचक है तथा इस लिए यहा स्थल साल भर देखने के लिए अच्छा  है तथा तथा स्थल चाय के बागानों मदिरो तथा मठों के लिए प्रसिद्ध है तथा
 पहुंचा जा सकता है। पसंदीदा पर्यटन स्थलों में से एक, टाइगर हिल दार्जिलिंग की सबसे ऊंची पर्वतमाला है। इसी तरह पास की बर्फ से पुरानी कंचनजंघा की पहाड़ियों के पीछे से सूर्योदय का मनमोहक नजारा देखने को मिलता है। यही से आपको विश्व के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट एवरेस्ट की चोटी भी देखने को मिलेगी।
दार्जिलिंगः पहाड़ों की रानी का इतिहास दार्जिलिंग, जिसे "पहाड़ों की रानी" के नाम से जाना जाता है, एक सुंदर पर्वतीय स्थल है जो भारत के पश्चिम बंगाल में स्थित है। इसका इतिहास समृद्ध और विविध है, जो प्राचीन काल से लेकर ब्रिटिश उपनिवेश काल और आधुनिक समय तक फैला हुआ है।
प्राचीन काल लेप्चा और भूतिया जनजातियाँ
दार्जिलिंग क्षेत्र की पहली जनजातियाँ। लेपचाओं ने इस क्षेत्र को "दार्जिलिंग" (बिजली की भूमि) नाम दिया। 1642 में नेपाल और सागर के बीच युद्ध के दौरान दार्जिलिंग पंजाब राज्य का हिस्सा बन गया। फिर 1780 के दशक में नेपाल के गोरखा सैनिकों ने दार्जिलिंग पर कब्ज़ा कर लिया था। इसी तरह के संघ और नेपाल में संघर्ष पैदा हुआ और अंततः दार्जिलिंग सिक्कम का हिस्सा बन गया।



 ब्रिटिश काल: 1814-1816 के एंग्लो-नेपाली युद्ध के बाद, सुगौली संधि के तहत दार्जिलिंग पर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का नियंत्रण हो गया। 1835 में, डिवीजन के राजा ने दार्जिलिंग पर ब्रिटिशों पर कब्ज़ा कर लिया। ब्रिटिशों ने दार्जिलिंग को एक सेनेटोरियम और पर्वतीय स्थल के रूप में विकसित किया। यहां पर वे चाय के बागों की स्थापना करते हैं, जो आज भी विश्व प्रसिद्ध हैं। 1881 में दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे का निर्माण हुआ, जिसे "टॉय ट्रेन" भी कहा जाता है। इस रेलवे लाइन दार्जिलिंग को सिलीगुड़ी से आयातित किया गया है और इसका अवलोकन
विश्व खनिज स्थल भी घोषित किया गया है।


 स्वतंत्रता के बाद 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद दार्जिलिंग पश्चिम बंगाल राज्य का हिस्सा बन गया। 1980 और 2000 के दशक में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) ने गोरखालैंड राज्य की मांग लेकर आंदोलन चलाया। इसमें राजनीतिक अस्थिरता हुई, लेकिन अंततः कुछ स्वाधीनता क्षेत्र के
साथ समझौता हो गया।
आधुनिक दार्जिलिंग आज दार्जिलिंग एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, जो अपने चाय बागानों, प्राकृतिक सुंदरता, हिमालय के शानदार दृश्य और सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है। यह केवल ज्वालामुखी और इतिहासकारों के अनुसंधान के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान नहीं है। है. दार्जिलिंग का यह इतिहास एक विशिष्ट पहचान देता है, जो भारतीय उपमहाद्वीप के विविध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्मारकों का हिस्सा है।

अगले एपिसोड मे पढेंगे ताजमहल के बारे मै अगले रविवार को 
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