जम्मू-कश्मीर के रियासी में तीर्थयात्रियों की बस पर हुए आतंकी हमले के बाद संदिग्धों की धरपकड़ तेज़ हो गई है. पुलिस ने 50 संदिग्धों को हिरासत में लिया है. ये पुलिस और सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई है. सुरक्षा बलों को जांच में महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिससे हमले की साजिश में शामिल संभावित लोगों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने में मदद मिली है. हाल ही में पौनी इलाके में तीर्थयात्रियों की बस पर हुए आतंकी हमले में 9 लोगों की मौत गई थी. इंडिया टुडे से जुड़े अशरफ वानी की रिपोर्ट के मुताबिक सुरक्षाबलों सर्च ऑपरेशन चलाया था. जिसके तहत ये कार्रवाई की गई है.
इस बीच जम्मू-कश्मीर पुलिस ने डोडा जिले में हुए हमलों में शामिल चार आतंकियों के स्केच भी जारी किया है. साथ ही कोई भी जरूरी जानकारी देने पर 20 लाख रुपयों का इनाम देने की घोषणा की है. आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों ने सुरक्षा बलों पर आतंकी संगठनों द्वारा और ‘फिदायीन’ आत्मघाती हमलों की चेतावनी दी है. जिसकी वजह से राजौरी और जम्मू जिले के सुंदरबनी, नौशेरा, डोमाना, लाम्बेरी और अखनूर इलाकों सहित घाटी के कई जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है. साथ ही सुरक्षा बलों के शिविरों, प्रतिष्ठानों पर अधिकतम सतर्कता बरतने की चेतावनी दी गई है.
जम्मू-कश्मीर' में 10 जून से 12 जून के बीच '72' घंटे के दौरान तीन बड़े आतंकी हमले हुए हैं। मंगलवार रात को डोडा में शुरू हुआ एनकाउंटर अभी खत्म नहीं हुआ है। सेना के करीब आधा दर्जन जवान घायल बताए जा रहे हैं। हीरानगर एनकाउंटर में सीआरपीएफ की 121वीं बटालियन के जवान कबीर दास विकी ने सर्वोच्च बलिदान दिया है। सुरक्षा बलों द्वारा अलग-अलग जिलों में सर्च ऑपरेशन चलाया गया है। संदिग्ध आतंकियों के स्केच जारी हो रहे हैं। ऑपरेशन से जुड़े विश्वस्त सूत्रों का कहना है, 72 घंटे में तीन हमले, ये एक सोची समझी रणनीति है। पाकिस्तान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर, ताजा घुसपैठ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। भले ही बॉर्डर पर सीजफायर लागू है, लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के सदस्य, जम्मू कश्मीर में प्रवेश कर रहे हैं। फोर्स के सूत्रों ने यह बात मानी है कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन में आतंकियों को हर तरह की मदद पहुंचाने वाली 'ब्लैक शीप' (काली भेड़) मौजूद हैं। इनके चलते पड़ोसी मुल्क के दहशतगर्द, सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाते हैं। 'ब्लैक शीप' की खोज और पहचान के लिए अलग से ऑपरेशन शुरू किया गया है।
'जम्मू-कश्मीर' में 10 जून से 12 जून के बीच '72' घंटे के दौरान तीन बड़े आतंकी हमले हुए हैं। मंगलवार रात को डोडा में शुरू हुआ एनकाउंटर अभी खत्म नहीं हुआ है। सेना के करीब आधा दर्जन जवान घायल बताए जा रहे हैं। हीरानगर एनकाउंटर में सीआरपीएफ की 121वीं बटालियन के जवान कबीर दास विकी ने सर्वोच्च बलिदान दिया है। सुरक्षा बलों द्वारा अलग-अलग जिलों में सर्च ऑपरेशन चलाया गया है। संदिग्ध आतंकियों के स्केच जारी हो रहे हैं। ऑपरेशन से जुड़े विश्वस्त सूत्रों का कहना है,
घंटे में तीन हमले, ये एक सोची समझी रणनीति है। पाकिस्तान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर, ताजा घुसपैठ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। भले ही बॉर्डर पर सीजफायर लागू है, लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के सदस्य, जम्मू कश्मीर में प्रवेश कर रहे हैं। फोर्स के सूत्रों ने यह बात मानी है कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन में आतंकियों को हर तरह की मदद पहुंचाने वाली 'ब्लैक शीप' (काली भेड़) मौजूद हैं। इनके चलते पड़ोसी मुल्क के दहशतगर्द, सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाते हैं। 'ब्लैक शीप' की खोज और पहचान के लिए अलग से ऑपरेशन शुरू किया गया है।
आतंकवाद: अर्थ, इतिहास, और निपटने की रणनीतियाँ
आतंकवाद एक ऐसा शब्द है जिसका प्रयोग आमतौर पर भय और आतंक फैलाने वाली उन गतिविधियों के लिए किया जाता है, जो राजनीतिक, धार्मिक या वैचारिक उद्देश्यों से प्रेरित होती हैं। आतंकवाद की परिभाषा में नागरिकों या निर्दोष जनों को लक्षित करके आतंक का वातावरण उत्पन्न करना भी शामिल है।
आतंकवाद के इतिहास
आतंकवाद का इतिहास बहुत पुराना है और इसकी शुरुआत का कोई सटीक बिंदु नहीं है। ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाए, तो आतंकवादी कृत्यों का उपयोग हमेशा से विरोधी सत्ता के खिलाफ एक हथियार के रूप में किया गया है। आधुनिक आतंकवाद की जड़ें 20वीं शताब्दी में मिलती हैं, जब राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों के कारण विभिन्न समूह बने।
आतंकवाद के मुख्य कारण
राजनीतिक असहमति: सत्ता के खिलाफ या किसी विशेष राजनीतिक विचारधारा के समर्थन में किए गए हमले।
धार्मिक उग्रवाद: धार्मिक मान्यताओं के नाम पर आतंकी हमले।
आर्थिक असमानता: आर्थिक असमानताओं का विरोध करने के लिए आतंकवादी कृत्य।
सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दे: किसी समाज या संस्कृति के खिलाफ हमले।
प्रमुख आतंकवादी संगठनों की सूची
अल-क़ाइदा
इस्लामिक स्टेट (IS)
तालिबान
बोको हराम
आतंकवाद के प्रभाव
आतंकवाद का प्रभाव व्यापक और विनाशकारी होता है। इसमें न केवल जीवन की हानि होती है, बल्कि आर्थिक विकास, सामाजिक सद्भाव, और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी गहरा असर पड़ता है। आतंकवाद से उत्पन्न भय और असुरक्षा का मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी होता है।
आतंकवाद से निपटने की रणनीतियाँ
सुरक्षा उपायों में सुधार: सुरक्षा बलों को आधुनिक तकनीकी से लैस करना।
खुफिया जानकारी का संग्रहण और साझा करना: आतंकवादी गतिविधियों की पहचान और निपटान के लिए।
वैचारिक लड़ाई: आतंकवाद के उद्देश्यों और विचारधाराओं का प्रतिकार।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: विश्व स्तर पर आतंकवादी गतिविधियों के विरुद्ध संयुक्त प्रयास।
आतंकवाद के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय प्रयास
आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए, अनेक देशों ने संयुक्त राष्ट्र संघ और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के माध्यम से सहयोग किया है। इसमें सुरक्षा, वित्त, और कानूनी मापदंडों को मजबूत करना शामिल है ताकि आतंकवादी गतिविधियों का पता लगाने, रोकने और उन पर कार्यवाही कर सकें।
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